
धरना में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विभिन्न जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि जमुआ प्रखंड में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है और आम लोगों को अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
नेताओं ने आरोप लगाया कि जमीन म्यूटेशन के मामलों में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है तथा बिना लेन-देन के लोगों का कार्य नहीं हो रहा है, जिससे गरीब और किसान वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन व्यवस्था) में भी व्यापक गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जरूरतमंद लाभुकों तक पूरा राशन नहीं पहुंच रहा है तथा कई स्थानों पर राशन की कालाबाजारी की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। इसके अलावा घरेलू गैस सिलेंडरों की कथित कालाबाजारी को लेकर भी कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
माले नेता अशोक पासवान ने कहा, “जमुआ प्रखंड में भ्रष्टाचार और जनता के शोषण के खिलाफ हम लोग आज एक दिवसीय धरना पर बैठे हैं। जमीन म्यूटेशन, राशन वितरण और गैस सिलेंडर की कालाबाजारी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। यदि प्रशासन जल्द ठोस कार्रवाई नहीं करता है तो भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) अनिश्चितकालीन धरना और व्यापक जन आंदोलन के लिए बाध्य होगी।”
धरना में माले नेता अशोक पासवान, विजय पाण्डेय, रितलाल वर्मा, मनवर हसन बंटी, रंजीत यादव, असगर अली सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
धरना के दौरान पार्टी नेताओं ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि जमीन म्यूटेशन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, राशन वितरण व्यवस्था में सुधार किया जाए तथा गैस सिलेंडर की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों एवं बिचौलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की गई।
एकदिवसीय धरना के माध्यम से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जनसमस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों और मांगों पर क्या कदम उठाता है।
रिपोर्ट : जमुआ, गिरिडीह


