गिरिडीह में 108 एंबुलेंस सेवा बनी जीवन रक्षा सरकार द्वारा सम्मान फाउंडेशन को 108 एम्बुलेंस चलाने की जिम्मेदारी दी गई है जो सही साबित हुई गिरिडीह में कुल 108 एंबुलेंस की संख्या 39 है उसमें 33 गाड़ियां संचालित नई एंबुलेंस उतारने की तैयारी जोरों से हो रही है

झारखंड सरकार की आपातकालीन 108 एम्बुलेंस सेवा के तहत गिरिडीह में उपलब्ध 39 एंबुलेंस में 33 एम्बुलेंस संचालित कार्य कर रही है, अन्य एंबुलेंस मरम्मत की कमी एवं तकनीकी खामियों के कारण उपयोग में नहीं है स्वास्थ्य विभाग और सम्मान फाउंडेशन रांची के डायरेक्टर श्री सुमित बसु एक टीम बनाकर तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए कार्य कर रही है ।गिरिडीह जिला में गंभीर बीमारी रोड दुर्घटना, महिलाओं का परिसव एवं अन्य रोगों के लिए108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा संजीवनी बन गई है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक, समय पर अस्पताल पहुंचाने की इसकी क्षमता ने अनगिनत, जिंदगियों को बचाया है। गिरिडीह जिला में फरवरी 2025 को नई एजेंसी सम्मान फाउंडेशन ने आपातकालीन 108 एंबुलेंस का कार्यभार संभालने के बाद 108 एंबुलेंस को और मजबूत एवं व्यवस्थित कर दिया है, और सबसे बड़ी बात यह है कि 108 एम्बुलेंस पूरी तरह से निशुल्क है जिसके कारण गरीब , गुरुवा ,असहाय ,निम्न स्तर के लोग एवं रोड दुर्घटना महिला की डिलीवरी और बहुत कम समय में 108 एम्बुलेंस घटनास्थल पर पहुंच जाती है जिससे गिरिडीह जिला के जनता को 108 एम्बुलेंस जान बचाकर जीवन रक्षक का कार्य कर रही है। एवं जीवनसंघानी साबित हो रही है। गिरिडीह जिला के एसीओ  श्री धीरज कुमार कुशवाहा ने बताया कि कई एंबुलेंस 3 लाख किलोमीटर से ऊपर चलने के बाद एंबुलेंस में तकनीकी खराबी आती है जिस सम्मान फाउंडेशन एजेंसी के द्वारा समय-समय पर मरम्मत करवाया जाता है ताकि पेशेंट को लाने में किसी तरीका का परेशानी ना हो और 108 एम्बुलेंस में पायलट और ईएमटी अपने-अपनी पाली के हिसाब से दिन और रात में ड्यूटी करते हैं और गाड़ी में मरीजों को इलाज के दौरान अस्पताल तक पहुंचते हैं, इस बीच जिला में नई एंबुलेंस उतरने की तैयारी अंतिम चरण में है। जिससे सेवा और भी चौकस एवं प्रभाव शाली हो जाएगी। आपातकालीन कॉल मिलते ही 108 एंबुलेंस तत्काल रवाना होती है और कई मामलों में गोल्डन आवर के भीतर मरीज को अस्पताल तक पहुंच कर उसकी जान बचाने में सफलता मिली है , दूर दराज गांवों में एंबुलेंस पहुंचकर जनता की जान बचा रही है जहां प्राइवेट गाड़ियां जाने से डरती है उस जगह पर भी 108 एंबुलेंस पहुंचकर जीवन रक्षक का सहारा बन रही है। 108 एंबुलेंस सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं है, बल्कि चलते-फिरती मोबाइल लाइव सपोर्ट यूनिट है, 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर, स्टेचर, फर्स्ट एड किट, दवा इत्यादि उपलब्ध रहते हैं जिससे गंभीर मरीजों को स्थिर हालत में जिला अस्पताल या रेफर केंद्र तक इलाज के दौरान ले जाना आसान हो जाता है , कोविद-19 में भी महामारी के समय 108 एम्बुलेंस योद्धा के रूप में राज्य स्तरीय काम किया एवं संक्रमित मरीज की जान बचाई
झारखंड सरकार की आपातकालीन 108 एम्बुलेंस सेवा के तहत गिरिडीह में उपलब्ध 39 एंबुलेंस में 33 एम्बुलेंस संचालित कार्य कर रही है, अन्य एंबुलेंस मरम्मत की कमी एवं तकनीकी खामियों के कारण उपयोग में नहीं है स्वास्थ्य विभाग और सम्मान फाउंडेशन रांची के डायरेक्टर श्री सुमित बसु एक टीम बनाकर तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए कार्य कर रही है ।गिरिडीह जिला में गंभीर बीमारी रोड दुर्घटना, महिलाओं का परिसव एवं अन्य रोगों के लिए108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा संजीवनी बन गई है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक, समय पर अस्पताल पहुंचाने की इसकी क्षमता ने अनगिनत, जिंदगियों को बचाया है। गिरिडीह जिला में फरवरी 2025 को नई एजेंसी सम्मान फाउंडेशन ने आपातकालीन 108 एंबुलेंस का कार्यभार संभालने के बाद 108 एंबुलेंस को और मजबूत एवं व्यवस्थित कर दिया है, और सबसे बड़ी बात यह है कि 108 एम्बुलेंस पूरी तरह से निशुल्क है जिसके कारण गरीब , गुरुवा ,असहाय ,निम्न स्तर के लोग एवं रोड दुर्घटना महिला की डिलीवरी और बहुत कम समय में 108 एम्बुलेंस घटनास्थल पर पहुंच जाती है जिससे गिरिडीह जिला के जनता को 108 एम्बुलेंस जान बचाकर जीवन रक्षक का कार्य कर रही है। एवं जीवनसंघानी साबित हो रही है। गिरिडीह जिला के एसीओ श्री धीरज कुमार कुशवाहा ने बताया कि कई एंबुलेंस 3 लाख किलोमीटर से ऊपर चलने के बाद एंबुलेंस में तकनीकी खराबी आती है जिस सम्मान फाउंडेशन एजेंसी के द्वारा समय-समय पर मरम्मत करवाया जाता है ताकि पेशेंट को लाने में किसी तरीका का परेशानी ना हो और 108 एम्बुलेंस में पायलट और ईएमटी अपने-अपनी पाली के हिसाब से दिन और रात में ड्यूटी करते हैं और गाड़ी में मरीजों को इलाज के दौरान अस्पताल तक पहुंचते हैं, इस बीच जिला में नई एंबुलेंस उतरने की तैयारी अंतिम चरण में है। जिससे सेवा और भी चौकस एवं प्रभाव शाली हो जाएगी। आपातकालीन कॉल मिलते ही 108 एंबुलेंस तत्काल रवाना होती है और कई मामलों में गोल्डन आवर के भीतर मरीज को अस्पताल तक पहुंच कर उसकी जान बचाने में सफलता मिली है , दूर दराज गांवों में एंबुलेंस पहुंचकर जनता की जान बचा रही है जहां प्राइवेट गाड़ियां जाने से डरती है उस जगह पर भी 108 एंबुलेंस पहुंचकर जीवन रक्षक का सहारा बन रही है। 108 एंबुलेंस सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं है, बल्कि चलते-फिरती मोबाइल लाइव सपोर्ट यूनिट है, 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर, स्टेचर, फर्स्ट एड किट, दवा इत्यादि उपलब्ध रहते हैं जिससे गंभीर मरीजों को स्थिर हालत में जिला अस्पताल या रेफर केंद्र तक इलाज के दौरान ले जाना आसान हो जाता है , कोविद-19 में भी महामारी के समय 108 एम्बुलेंस योद्धा के रूप में राज्य स्तरीय काम किया एवं संक्रमित मरीज की जान बचाई

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