तिसरी (गिरिडीह):
तिसरी प्रखंड के मनसाडीह पंचायत अंतर्गत तिसरो गांव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा प्रति लाभुक 5 किलो अनाज देने का प्रावधान है, लेकिन उन्हें मात्र 4 किलो अनाज ही दिया जा रहा है। यानी हर लाभुक के हिस्से से एक किलो अनाज की कथित कटौती की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो संबंधित डीलर जमाल उद्दीन ने कथित तौर पर कहा कि “ऊपर तक देना पड़ता है।” यदि ग्रामीणों का यह आरोप सही है तो सवाल केवल एक डीलर पर नहीं, बल्कि पूरे राशन वितरण तंत्र पर खड़ा होता है। गरीबों के हिस्से का राशन कहां जा रहा है? इसकी जवाबदेही किसकी है?
जब इस संबंध में डीलर संघ के अध्यक्ष रामचरित्र यादव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित मात्रा से अधिक कटौती की जा रही है तो यह गलत है। वहीं प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) ने स्वीकार किया कि मामले की शिकायत पहले भी मिली है और जल्द जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि हर लाभुक से एक किलो अनाज कम दिया जा रहा है, तो महीनों और वर्षों में गरीबों के हिस्से का कितना राशन गायब हुआ होगा? क्या यह सिर्फ एक गांव का मामला है या पूरे क्षेत्र में गरीबों के अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है?
सरकार गरीबों को मुफ्त अनाज देकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का दावा करती है, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर लाभुकों के हिस्से में कटौती हो रही है तो यह गरीबों के साथ सीधा अन्याय है। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करे, ताकि गरीबों का हक उन्हें पूरा मिल सके।
गरीबों के राशन पर डाका या सिस्टम की मिलीभगत। तिसरी के तिसरो गांव में 5 किलो की जगह 4 किलो अनाज देने का आरोप
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