तिसरी प्रखंड से बड़े पैमाने पर अवैध माइका की तस्करी की जा रही है। तिसरी प्रखंड के उतरी छोर पर स्थित दूर-दराज के गांवों में उत्खनन करवाने से लेकर संग्रह कराकर माइका माफियाओं द्वारा हर दिन लगभग 20 लाख से अधिक लागत के अवैध माइका की तस्करी की जाती है। मजे की बात यह है कि वन विभाग और वन विभाग द्वारा लगाए गए चेकनाका की नाक के नीचे से इस गोरखधंधे को अंजाम दिया जाता है। बावजूद इसके वन और खनन विभाग चुप्पी साधे हुए हैं। जिसके कारण माइका माफियाओं का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि तिसरी प्रखंड के अब्रखा, ज़िनाडीह,पचरुखी, खटपोक, लोकाय, साखम, गोलगो, कर्णपुरा, डुब्बा, असनातरी, लदबेदवा, नारोटांड़, कानीचिहार, मनसाडीह आदि गांवों के बड़े भूखंड पर अवैध रूप से माइका का उत्खनन करवाया जाता है। इसके बाद गांव के ही किसी घर में माइका का संग्रह किया जाता है। काफी मात्रा में माइका संग्रह किए जाने के बाद ट्रक, मिनी ट्रक और पिकअप गाड़ी में इसे लोड कर रात के अंधेरे में इसे घंघरीकुरा व जामडार के रास्ते से डोरंडा और घोड़थंबा होते हुए डोमचांच व मसनोडीह ले जाकर इसकी तस्करी की जाती है। इस गोरखधंधे में तिसरी के कई माफिया और सफेदपोश लगे हुए हैं और इस काले धंधे से हर दिन लाखों की कमाई कर मालामाल हो रहे हैं। इसके बाद ट्रकों में लोड करके गिरिडीह, डोमचांच, मसनोडीह और कोडरमा ले जाते थे। किंतु पुलिस और वन विभाग द्वारा माइका उत्खनन से लेकर इसके अवैध कारोबार पर नकेल कसे जाने तथा फैक्ट्रियों में लगातार छापेमारी कर इसे सील करने के बाद माइका माफियाओं ने माइका के अवैध कारोबार करने का तरीका ही बदल लिया है। अब तस्कर और माफियाओं द्वारा जंगली क्षेत्रों में माइका का अवैध उत्खनन करवाने का काम किया जाता है, फिर उत्खनन किए गए माइका को गांव में ही संग्रह किया जाता है। इसके बाद छोटे, बड़े ट्रक या फिर पिकअप गाड़ी में लोड करवाकर डोरंडा और घोड़थंबा के रास्ते से डोमचांच और मसनोडीह स्थित फैक्ट्रियों में ले जाया जाता है।