
क्षेत्र भ्रमण के दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से भी इस मुद्दे पर बात की। लोगों ने बताया कि, इस सड़क की बदहाली से उनके लिए आवागमन में काफी कठिनाई होती है। एंबुलेंस तक गांव आने से कतराते हैं। कहा कि, एक तो प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए संपर्क मार्ग जर्जर है तो दूसरी ओर ताराटांड़ से डमरगुरहा होकर जिला मुख्यालय गिरिडीह जाने के लिए सबसे शॉर्टकट रास्ते में भी नदी में पुल नहीं है।लगातार विकास के नाम पर उनसे वोट लिया जाता है लेकिन बाद में उनका ख्याल नहीं किया जाता।
लोगों की बातों को सुनने पर श्री यादव ने कहा कि उन्हें अपने सवालों पर संगठित होकर मुखर होना चाहिए। यदि प्रशासन तथा सरकार ने इस सड़क और नदी में पुल बनाने को लेकर रुचि नहीं दिखाती तो वे आंदोलन को तैयार रहें।
मांग करने वालों में प्रदीप यादव, साहेब यादव, पप्पू यादव, अशोक यादव, रामबाबू यादव, परमानंद यादव, छट्ठू राणा, एतवारी राणा, सोना राणा, भुनेश्वर राणा, छट्ठू राणा 2, कैलाश रजक, दौलत रजक, महेंद्र रजक सहित अन्य थे।
