गिरिडीह के सिविल सर्जन श्री शिव प्रसाद मिश्रा की फोटो

चिकित्सक भगवान नही होते हैं पर उनका प्रयास दक्षता है और हाथों का यश खातरे से इंसान को बहार ला सकता है। इसके लिए रोगियों को चिकित्सक की सलाह मानना जरुरी है, चिकित्सक एक सेवा धर्म है इसमें कहीं भी किन्तु परन्तु नहीं है।हमरा प्रयास हमेशा से रहा है कि मरीजों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाय कि ताकि उन्हें रेफर नही करना पड़े।यह बात गिरिडीह सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ ० श्री शिव प्रसाद मिश्रा एक औपचारिक भेंट में कही।उन्होंने ने बताया कि गिरिडीह सदर अस्पताल सभी अत्याधुनिक चिकित्सायंत्र और सुविधाओं से लैस होगा। इसके लिए प्रयास जारी है, वर्तमान सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अभी यहां लैब रोजाना कार्यरत है एवं अल्ट्रा साउंड मशीन सप्ताह में चार दिन मंगलवार , बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को मरीजों के लिए कार्यरत है। चार डायलिसिस मशीन पी पी मोड में कार्यरत है और चार और मंगायी जा रही है।
सिटी स्कैन मशीन भी जल्द लगने वाली है। इस सुविधाओं के बाद मरीजों को रेफर के बदले बेहतर उपचार का लाभ सुविधा प्राप्त होगा।इस प्रकार स्वास्थ्य सुविधा में गिरिडीह जिला खत्मनिर्भर होगा। एक सवाल के जवाब में शिव प्रसाद मिश्रा ने कहा कि बेहतर प्रबंधकिय व्यवस्था से ही अंजाम तक पहुंचा जा सकता है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मरीजों को अपना रोग नही छुपाना चाहिए। मरीजों के खुलापन और चिकित्सकों का समन्वित व्यहवार से ही रोगी लाभान्वित हो सकते हैं।
डॉ० मिश्रा 1988 में सर्वप्रथम पहली बार राजधनवार प्रखंड के रेफर अस्पताल में नियुक्त  हुए । अब तक अधिकांश कार्यकाल गिरिडीह जिला अन्तर्गत  कार्य करते गुजरा रहा है। छत्तीस वर्षो के कार्यकाल में एक बार मधुपुर एवं एक बार सीएस बनाकर गौडा तबादला हुआ बाकी उन्तीस वर्षों की कार्यकाल गिरिडीह जिला ही रहा।
उन्होंने ने बताया कि 2021 में  मुझे सिविल सर्जन प्रोन्नति के  साथ गिरिडीह की प्रभार सौंपा गया तब से मैं यहां कार्यरत हूं। और मेरा प्रयास है कि रोगियों को उपचार के लिए अन्यत्र नही जाना पड़े, एक अन्य सवाल पर मिश्रा ने कहा कि राजनीतिकों दवाव से अलग रहकर जो शंभव होता वही किया जाता है। राजधनवार प्रखंड रेफर अस्पताल और साथ कार्य करने वाले चिकित्सक श्री अरबिंद कुमार और सुरेश चंद्र शर्मा की कार्यशैली का चर्चा करते हुए कहा कि हम तीनों की प्रयास होता था कि बढ़िया से बढ़िया इलाज करते थे ताकि रेफर नही करना पड़े। आगे कहा कि चिकित्सा से जीतना शंभव हो करना चाहिए उससे असंभव भी संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में झोला छाप डॉक्टर के कारण इस पेशे को बदनाम किया है। जबकि चिकित्सक को हर किसी का दर्द को अपना दर्द समझना होगा कारण कि उदहारण के रुप में डॉक्टर को लोग दुसरे ईश्वर कहते हैं इस बात को ध्यान में रखकर चिकित्सक को इलाज पर ध्यान देना होगा ।
चिकित्सक भगवान नही होते हैं पर उनका प्रयास दक्षता है और हाथों का यश खातरे से इंसान को बहार ला सकता है। इसके लिए रोगियों को चिकित्सक की सलाह मानना जरुरी है, चिकित्सक एक सेवा धर्म है इसमें कहीं भी किन्तु परन्तु नहीं है।हमरा प्रयास हमेशा से रहा है कि मरीजों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाय कि ताकि उन्हें रेफर नही करना पड़े।यह बात गिरिडीह सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ ० श्री शिव प्रसाद मिश्रा एक औपचारिक भेंट में कही।
उन्होंने ने बताया कि गिरिडीह सदर अस्पताल सभी अत्याधुनिक चिकित्सायंत्र और सुविधाओं से लैस होगा। इसके लिए प्रयास जारी है, वर्तमान सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अभी यहां लैब रोजाना कार्यरत है एवं अल्ट्रा साउंड मशीन सप्ताह में चार दिन मंगलवार , बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को मरीजों के लिए कार्यरत है। चार डायलिसिस मशीन पी पी मोड में कार्यरत है और चार और मंगायी जा रही है।
सिटी स्कैन मशीन भी जल्द लगने वाली है। इस सुविधाओं के बाद मरीजों को रेफर के बदले बेहतर उपचार का लाभ सुविधा प्राप्त होगा।इस प्रकार स्वास्थ्य सुविधा में गिरिडीह जिला खत्मनिर्भर होगा। एक सवाल के जवाब में शिव प्रसाद मिश्रा ने कहा कि बेहतर प्रबंधकिय व्यवस्था से ही अंजाम तक पहुंचा जा सकता है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मरीजों को अपना रोग नही छुपाना चाहिए। मरीजों के खुलापन और चिकित्सकों का समन्वित व्यहवार से ही रोगी लाभान्वित हो सकते हैं।
डॉ० मिश्रा 1988 में सर्वप्रथम पहली बार राजधनवार प्रखंड के रेफर अस्पताल में नियुक्त हुए । अब तक अधिकांश कार्यकाल गिरिडीह जिला अन्तर्गत कार्य करते गुजरा रहा है। छत्तीस वर्षो के कार्यकाल में एक बार मधुपुर एवं एक बार सीएस बनाकर गौडा तबादला हुआ बाकी उन्तीस वर्षों की कार्यकाल गिरिडीह जिला ही रहा।
उन्होंने ने बताया कि 2021 में मुझे सिविल सर्जन प्रोन्नति के साथ गिरिडीह की प्रभार सौंपा गया तब से मैं यहां कार्यरत हूं। और मेरा प्रयास है कि रोगियों को उपचार के लिए अन्यत्र नही जाना पड़े, एक अन्य सवाल पर मिश्रा ने कहा कि राजनीतिकों दवाव से अलग रहकर जो शंभव होता वही किया जाता है। राजधनवार प्रखंड रेफर अस्पताल और साथ कार्य करने वाले चिकित्सक श्री अरबिंद कुमार और सुरेश चंद्र शर्मा की कार्यशैली का चर्चा करते हुए कहा कि हम तीनों की प्रयास होता था कि बढ़िया से बढ़िया इलाज करते थे ताकि रेफर नही करना पड़े। आगे कहा कि चिकित्सा से जीतना शंभव हो करना चाहिए उससे असंभव भी संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में झोला छाप डॉक्टर के कारण इस पेशे को बदनाम किया है। जबकि चिकित्सक को हर किसी का दर्द को अपना दर्द समझना होगा कारण कि उदहारण के रुप में डॉक्टर को लोग दुसरे ईश्वर कहते हैं इस बात को ध्यान में रखकर चिकित्सक को इलाज पर ध्यान देना होगा ।

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