
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक सह अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार सिंह ने कहा कि वृद्धों की सेवा ही माता-पिता की सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के त्याग और पालन-पोषण की बदौलत ही आज हम अपने जीवन में आगे बढ़ पा रहे हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपने माता-पिता का सम्मान और सेवा करे।
प्राचार्य डॉ. अनुज कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में प्रेम, सौहार्द और मानवीय मूल्यों को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा करना प्रत्येक संतान का प्रथम दायित्व है तथा उन्हें वृद्धाश्रम भेजने जैसी भूल से बचना चाहिए।
प्रो. कौशल राज ने कहा कि समाज के विकास में वृद्धजनों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने कर्तव्यों को समझें और बुजुर्गों के अनुभवों एवं संघर्षों का सम्मान करें।
कार्यक्रम में डॉ. संजीव कुमार सिंह, प्रो. राजकिशोर प्रसाद, प्रो. संदीप चौधरी, प्रो. सोमा सूत्रधर, प्रो. पोरस कुमार, प्रो. बृजमोहन, राजेश, पूजा, गायत्री सहित सभी प्रशिक्षुओं ने सक्रिय एवं सराहनीय योगदान दिया।

