शानडीह: समाज के मजबूत आधार स्तम्भ लक्ष्मी सिंह का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

शानडीह/गिरिडीह:
सूर्यवंशी राजपूत क्षत्रिय घटवाल जनजाति विकास समिति को आज एक अपूरणीय क्षति हुई है। समिति के पूर्व जिला कोषाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक लक्ष्मी सिंह का सोमवार को लगभग 11 बजे दिन निधन हो गया। पिछले कुछ दिनों से वे अस्वस्थ चल रहे थे और इसी दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त हो गया है।

90 वर्ष की आयु में जीवन की अंतिम यात्रा पूर्ण करने वाले लक्ष्मी सिंह समाज के उन वरिष्ठ व्यक्तित्वों में गिने जाते थे, जिन्होंने अपनी आधी जिंदगी समाज-सेवा के लिए समर्पित कर दी। एक शिक्षक के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी लोग आदर्श मानते हैं, वहीं समाज के संगठनात्मक कार्यों में उनकी सक्रियता ने उन्हें एक मजबूत स्तम्भ के रूप में स्थापित किया था।

समाज के लोगों का कहना है कि लक्ष्मी सिंह हर महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य में बढ़-चढ़कर शामिल होते थे। वे न सिर्फ संगठन को मजबूत बनाने में अग्रणी रहे, बल्कि नई पीढ़ी को समाज के प्रति जागरूक करने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनकी सादगी, समर्पण और अनुशासन से प्रेरित होकर कई लोग समाजसेवा से जुड़े।

उनके निधन पर जिला कमिटी, सभी प्रखंड कमिटी, तथा विभिन्न पंचायतों के समाजसेवी नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि लक्ष्मी सिंह जैसे व्यक्तित्व बार-बार जन्म नहीं लेते। उनके जाने से समाज को जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई संभव नहीं।

जिला कमिटी द्वारा सभी जेष्ठ-श्रेष्ठ, सम्मानित बंधुओं, युवा साथियों और समाज के छोटे-बड़े सदस्यों से अपील की गई है कि—

जिस प्रकार समाज अन्य अवसरों पर एकजुट होकर श्रद्धांजलि देता है,

उसी भाव और उसी एकता के साथ अधिक से अधिक संख्या में शानडीह पहुँचें,

और स्वर्गीय लक्ष्मी सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अंतिम विदाई दें।

स्थानीय ग्रामीणों में भी शोक की लहर है। कई लोगों ने बताया कि वे न सिर्फ एक शिक्षक थे, बल्कि उनके लिए एक मार्गदर्शक और पिता समान व्यक्तित्व थे। उनके निधन से गांव में एक ऐसा खालीपन पैदा हो गया है, जिसे भर पाना मुश्किल होगा।

अंत में, समाज की ओर से दिवंगत आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की गई और ईश्वर से यह कामना की गई कि शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करें।

ॐ शांति।

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