

ग्रामीणों के अनुसार, इस पुल का शिलान्यास उस समय झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष, धनवार विधायक बाबूलाल मरांडी ने किया था। शिलान्यास के दौरान उन्होंने निर्माण एजेंसी को गुणवत्ता और मजबूती के साथ कार्य करने का निर्देश दिया था। लेकिन पुल की मौजूदा स्थिति देखकर लोग निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल के गार्डवाल और अप्रोच सड़क के धंसने की सूचना कई दिन पहले ही संबंधित ठेकेदार और विभाग के कार्य पालक अभियंता सुबोध कुमार को दे दी गई थी। बताया जाता है कि सूचना मिलने के बाद केवल एक मिस्त्री और दो मजदूर भेजकर औपचारिक मरम्मत की कोशिश की गई, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई, तो लगातार बारिश के कारण अप्रोच सड़क पूरी तरह बह सकती है। इससे आवागमन बाधित होने के साथ किसी बड़े हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, गुणवत्ता की समीक्षा तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली योजनाओं में इस तरह की स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
फिलहाल इस मामले में संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
