RTE एवं NEP 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित

गिरिडीह, 20 जुलाई 2026: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर LEADS द्वारा CACL और RTE फोरम के सहयोग से बनावल धर्मशाला, गिरिडीह में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा बाल श्रम उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तिसरी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मनीष कुमार ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है और समाज के सभी वर्गों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने गांव स्तर पर शिक्षा से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर सामूहिक प्रयासों से उनके समाधान पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथियों में जिला बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य योगेंद्र यादव, जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्य कामेश्वर कुमार, तिसरी बीआरसी के बीपीओ अक्षय कुमार प्रभाकरन तथा तिसरी प्रखंड प्रमुख राजकुमार यादव शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने शिक्षा के अधिकार को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला में पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्यों, शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने में समुदाय की भूमिका पर चर्चा की।
इस अवसर पर बच्चों और युवाओं ने बाल श्रम के दुष्परिणामों तथा शिक्षा के महत्व पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने सपनों और भविष्य की आकांक्षाओं को साझा करते हुए शिक्षा को जीवन में बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम बताया।
कार्यक्रम में एसपीएस (SPS), जागो फाउंडेशन, सवेरा फाउंडेशन, केएससीएफ (KSCF) एवं अभिव्यक्ति फाउंडेशन सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए विद्यालयों, स्थानीय संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों तथा समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने तथा RTE एवं NEP 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यशाला को सफल बनाने में संस्था के सीनियर मैनेजर महेंद्र कुमार सहित LEADS की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से प्रत्येक बच्चे तक समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
गिरिडीह, 20 जुलाई 2026: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर LEADS द्वारा CACL और RTE फोरम के सहयोग से बनावल धर्मशाला, गिरिडीह में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा बाल श्रम उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तिसरी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मनीष कुमार ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है और समाज के सभी वर्गों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने गांव स्तर पर शिक्षा से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर सामूहिक प्रयासों से उनके समाधान पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथियों में जिला बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य योगेंद्र यादव, जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्य कामेश्वर कुमार, तिसरी बीआरसी के बीपीओ अक्षय कुमार प्रभाकरन तथा तिसरी प्रखंड प्रमुख राजकुमार यादव शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने शिक्षा के अधिकार को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला में पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्यों, शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने में समुदाय की भूमिका पर चर्चा की।
इस अवसर पर बच्चों और युवाओं ने बाल श्रम के दुष्परिणामों तथा शिक्षा के महत्व पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने सपनों और भविष्य की आकांक्षाओं को साझा करते हुए शिक्षा को जीवन में बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम बताया।
कार्यक्रम में एसपीएस (SPS), जागो फाउंडेशन, सवेरा फाउंडेशन, केएससीएफ (KSCF) एवं अभिव्यक्ति फाउंडेशन सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए विद्यालयों, स्थानीय संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों तथा समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने तथा RTE एवं NEP 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यशाला को सफल बनाने में संस्था के सीनियर मैनेजर महेंद्र कुमार सहित LEADS की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से प्रत्येक बच्चे तक समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

गिरिडीह, 20 जुलाई 2026: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर LEADS द्वारा CACL और RTE फोरम के सहयोग से बनावल धर्मशाला, गिरिडीह में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा बाल श्रम उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तिसरी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मनीष कुमार ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है और समाज के सभी वर्गों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने गांव स्तर पर शिक्षा से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर सामूहिक प्रयासों से उनके समाधान पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथियों में जिला बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य योगेंद्र यादव, जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्य कामेश्वर कुमार, तिसरी बीआरसी के बीपीओ अक्षय कुमार प्रभाकरन तथा तिसरी प्रखंड प्रमुख राजकुमार यादव शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने शिक्षा के अधिकार को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला में पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्यों, शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने में समुदाय की भूमिका पर चर्चा की।
इस अवसर पर बच्चों और युवाओं ने बाल श्रम के दुष्परिणामों तथा शिक्षा के महत्व पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने सपनों और भविष्य की आकांक्षाओं को साझा करते हुए शिक्षा को जीवन में बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम बताया।
कार्यक्रम में एसपीएस (SPS), जागो फाउंडेशन, सवेरा फाउंडेशन, केएससीएफ (KSCF) एवं अभिव्यक्ति फाउंडेशन सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए विद्यालयों, स्थानीय संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों तथा समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने तथा RTE एवं NEP 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यशाला को सफल बनाने में संस्था के सीनियर मैनेजर महेंद्र कुमार सहित LEADS की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से प्रत्येक बच्चे तक समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
गिरिडीह, 20 जुलाई 2026: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर LEADS द्वारा CACL और RTE फोरम के सहयोग से बनावल धर्मशाला, गिरिडीह में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा बाल श्रम उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तिसरी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मनीष कुमार ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है और समाज के सभी वर्गों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने गांव स्तर पर शिक्षा से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर सामूहिक प्रयासों से उनके समाधान पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथियों में जिला बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य योगेंद्र यादव, जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्य कामेश्वर कुमार, तिसरी बीआरसी के बीपीओ अक्षय कुमार प्रभाकरन तथा तिसरी प्रखंड प्रमुख राजकुमार यादव शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने शिक्षा के अधिकार को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला में पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्यों, शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने में समुदाय की भूमिका पर चर्चा की।
इस अवसर पर बच्चों और युवाओं ने बाल श्रम के दुष्परिणामों तथा शिक्षा के महत्व पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने सपनों और भविष्य की आकांक्षाओं को साझा करते हुए शिक्षा को जीवन में बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम बताया।
कार्यक्रम में एसपीएस (SPS), जागो फाउंडेशन, सवेरा फाउंडेशन, केएससीएफ (KSCF) एवं अभिव्यक्ति फाउंडेशन सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए विद्यालयों, स्थानीय संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों तथा समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने तथा RTE एवं NEP 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यशाला को सफल बनाने में संस्था के सीनियर मैनेजर महेंद्र कुमार सहित LEADS की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से प्रत्येक बच्चे तक समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

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