
करमा पर्व को भाई-बहन के अटूट प्रेम और प्राकृतिक पूजन का प्रतीक माना जाता है और लोकपर्व करमा पूजा हर साल भाद्रपद आणि भादो महीने के शुक्ल में पडने वाली एकादशी तिथि को मनाया जाता हैइस दिन विशेष रूप से बहने अपने भाइयों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है करमा पर्व करने वाली सभी बहनों के द्वारा कर्मा धर्मा कथा का भी विशेष महत्व बताया गया लोग कर्मा पेड़ के डाल की पूजा करते हैं

और रात के समय गीत गाकर नृत्य किया जाता है विभिन्न तरह के पकवान बनाए जाते हैं और परिवार के सुख समृद्धि की कामना की जाती है करमा पर्व पर महिलाएं व्रत करती है और कर्मा डाल की पूजा करती है और कर्मा पूजा में कर्मा धर्मा की कथा काफी प्रचलित है इस अवसर पर कर्मा धर्मा नाम दो भाइयों भाइयों की कथा सुनते हैं इस कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है और सभी बहने प्रकृति के प्रति सम्मान और आभार प्रकट प्रकट करते हुए पूजा संपन्न करती है जिसमें से सभी बहने उपस्थित थी गीता, चांदनी, खुशबू, पूनम, श्वेता, कौशल्या, मधु, रिंकी, पायल, कविता, लक्ष्मी, किरण और सभी महिलाएं उपस्थित थी ।
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